तेरी यादों का साया गहराता रहा, Furkan S Khan

 


ग़ज़ल

तेरी यादों का साया गहराता रहा,
ख़ामोशी में भी दिल बहलाता रहा।

चले थे अकेले पर कारवां बना,
हर मुसाफिर अपना बनाता रहा।

चांदनी रात में ख़्वाब सजते रहे,
दिल को तेरी खुशबू लुभाता रहा।

जख़्म दिल के वक़्त ने सिल दिए,
पर दर्द ग़ज़लों में समाता रहा।

इश्क़ का ये सफ़र भी अजीब था,
मंज़िलें पास आईं, पर दूर जाता रहा।

_ Furkan S Khan

Furkan S Khan

देश दुनिया में रह रहे भारतीय प्रवासियों से सम्बंधित समाचार, यहां मुख्य रूप से सऊदी अरब एवं गल्फ देशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों से सम्बंधित हिन्दी भाषा में समाचार एवं शायरी प्रकाशित की जाती है, ताजा अपडेट के लिए बनें रहे हमारे साथ, (मूड क्यों है आप का खराब हमें फॉलो करें न जनाब) facebook twitter instagram youtube

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने
play_arrow Video diversity_3 Channel login Share Menu