इज़राइल के प्रधानमंत्री द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ दिए गए हालिया विवादास्पद बयानों के खिलाफ कई अरब और इस्लामी देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इन देशों ने इन बयानों को अनुचित, उकसाने वाला और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया है।
कुवैत की प्रतिक्रिया
कुवैत की विदेश मंत्रालय ने इज़राइली प्रधानमंत्री के बयानों की कड़ी निंदा की और सऊदी अरब के साथ एकजुटता व्यक्त की। कुवैत ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह किसी भी ऐसे कदम का विरोध करता है जो सऊदी अरब की संप्रभुता और स्थिरता को खतरे में डालता हो। इसके अलावा, कुवैत ने फिलिस्तीनी लोगों के जबरन विस्थापन की किसी भी योजना को सख्ती से खारिज करते हुए, 1967 की सीमाओं पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन दोहराया।
بيان صادر عن وزارة الخارجية
— وزارة الخارجية (@MOFAKuwait) February 9, 2025
الأحد الموافق 9 فبراير 2025
تعرب وزارة الخارجية عن إدانة ورفض دولة الكويت الشديدين للتصريحات المستنكرة من قبل رئيس وزراء قوات الاحتلال الإسرائيلي ضد المملكة العربية السعودية الشقيقة، مؤكدةً وقوفها الصلب مع المملكة في مواجهة كل ما يهدد استقرارها… pic.twitter.com/tWvsedBuzm
बहरीन का कड़ा विरोध
बहरीन की विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर सख्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने इज़राइली सरकार द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ दिए गए बयानों को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। बहरीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का गंभीर उल्लंघन बताया। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता तभी संभव होगी जब फिलिस्तीनी लोगों को उनके वैध अधिकार मिलेंगे, जिसमें उनकी संप्रभु स्वतंत्र राज्य की स्थापना भी शामिल है।
مملكة البحرين تدين التصريحات الإسرائيلية غير المسؤولة تجاه المملكة العربية السعودية الشقيقةhttps://t.co/JXsX7jA1lC pic.twitter.com/zf8v8lxNZ1
— وزارة الخارجية 🇧🇭 (@bahdiplomatic) February 9, 2025
यमन की निंदा
यमन सरकार ने भी इज़राइली बयानों को उकसाने वाला और खतरनाक बताया। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि यह बयान न केवल सऊदी अरब बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है। यमन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में कड़ा रुख अपनाने की अपील की। साथ ही, उन्होंने सऊदी अरब द्वारा मध्य पूर्व में शांति की बहाली के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।
📃#بيان|| تعرب وزارة الخارجية في الجمهورية اليمنية عن إدانتها واستنكارها الشديدين، للتصريحات الاستفزازية الصادرة من الكيان الإسرائيلي، ضد المملكة العربية السعودية الشقيقة.
— وزارة خارجية الجمهورية اليمنية (@yemen_mofa) February 9, 2025
وتحذر وزارة الخارجية من خطورة التصريحات الإسرائيلية المتغطرسة التي لا تستهدف فقط المملكة العربية السعودية،… pic.twitter.com/2cHOkTqpaw
फिलिस्तीन का कड़ा प्रतिरोध
फिलिस्तीन के विदेश मंत्रालय ने इज़राइली सरकार के बयानों को नस्लवादी और भड़काऊ करार दिया। उन्होंने सऊदी अरब की संप्रभुता के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को अस्वीकार्य बताया और कहा कि इज़राइली सरकार की ऐसी बयानबाज़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ाने की सोची-समझी साजिश है।
"الخارجية" تدين التصريحات الإسرائيلية العنصرية التي طالبت بدولة فلسطينية على أراضي #السعودية الشقيقة 🇸🇦 🇵🇸
— State of Palestine - MFA 🇵🇸🇵🇸 (@pmofa) February 8, 2025
The Foreign Ministry condemns the racist Israeli statements calling for a Palestinian state on the territory of the the sisterly Kingdom of #Saudi_Arabia.@KSAmofaEN… pic.twitter.com/LGhRNRBkrz
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की प्रतिक्रिया
खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासिम मोहम्मद अल-बुदैवी ने भी इज़राइली बयानों की तीव्र आलोचना की और इसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों और कानूनों का उल्लंघन बताया। उन्होंने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति सऊदी अरब और खाड़ी देशों की प्रतिबद्धता को दोहराया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इज़राइल के ऐसे उत्तेजक बयानों के खिलाफ ठोस कदम उठाने की मांग की।
معالي الأمين العام لمجلس التعاون @jasemalbudaiwi: ندين ونستنكر بأشد العبارات تصريحات قوات الاحتلال الإسرائيلية ضد المملكة العربية السعودية.
— مجلس التعاون (@GCCSG) February 9, 2025
https://t.co/ku29PK6btD#مجلس_التعاون#المملكة_العربية_السعودية #السعودية #فلسطين pic.twitter.com/TytMA9ldYz
जॉर्डन की कड़ी प्रतिक्रिया
जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने इज़राइली बयानों को खतरनाक बताते हुए, इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया। जॉर्डन ने सऊदी अरब के प्रति पूर्ण समर्थन जताते हुए, इज़राइली सरकार की नीतियों को क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने वाला बताया।
دانت وزارة الخارجية وشؤون المغتربين بأشد العبارات التصريحات الإسرائيلية المعادية لحق الفلسطينيين بإقامة دولتهم المستقلة وذات السيادة على ترابهم الوطني، والدعوات العدوانية لإقامتها على أراضي المملكة العربية السعودية، باعتبارها دعوات تحريضية مدانة، تمثل خرقاً فاضحاً للقانون الدولي… pic.twitter.com/kyF7tx1FpS
— وزارة الخارجية وشؤون المغتربين الأردنية (@ForeignMinistry) February 8, 2025
सूडान और ओमान की आपत्ति
सूडान के विदेश मंत्रालय ने भी इज़राइल की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह सऊदी अरब की संप्रभुता पर सीधा हमला है। सूडान ने इज़राइल की फिलिस्तीनी जनता को जबरन बाहर निकालने की योजना की निंदा करते हुए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर ध्यान देने की अपील की।
جمهورية السودان
— وزارة خارجية جمهورية السودان 🇸🇩 (@MofaSudan) February 9, 2025
وزارة الخارجية
مكتب الناطق الرسمي وإدارة الإعلام
بيان صحفي
تستنكر وزارة الخارجية التصريحات غير المسؤولة الصادرة من الحكومة الإسرائيلية بخصوص المملكة العربية السعودية الشقيقة وما تضمنته من مساس بسيادتها وتحد القوانين والأعراف الدولية.
إن الحديث عن إقامة…
ओमान के विदेश मंत्रालय ने भी इज़राइली प्रधानमंत्री के बयानों की घोर निंदा की और सऊदी अरब के प्रति पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।
#بيان | أعربت وزارة الخارجية عن تضامن سلطنة عُمان التام مع المملكة العربية السعودية، ورفضها لتصريحات رئيس الوزراء الإسرائيلي بحق المملكة العربية السعودية ووحدة أراضيها. pic.twitter.com/3ZAJhWEm2P
— وزارة الخارجية (@FMofOman) February 9, 2025
पाकिस्तान की कड़ी प्रतिक्रिया
पाकिस्तान ने इज़राइली प्रधानमंत्री के बयान की तीखी निंदा की और नेतन्याहू को 'आतंकवादी' और 'युद्ध अपराधी' करार दिया।
पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया:
Pakistan Strongly Condemns Irresponsible Statement By Israeli Prime Minister pic.twitter.com/vGuydN6yIJ
— Ministry of Foreign Affairs - Pakistan (@ForeignOfficePk) February 9, 2025
- प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने नेतन्याहू पर निशाना साधते हुए कहा,
"नेतन्याहू एक आतंकवादी हैं, और उन्हें युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।"
- पाकिस्तान सरकार ने यह भी घोषणा की कि वह इज़राइली उत्पादों का बहिष्कार करेगा और उन कंपनियों की पहचान करेगा जो इज़राइल का समर्थन करती हैं।
- पाकिस्तान ने इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) की आपात बैठक बुलाने का सुझाव दिया ताकि इस मुद्दे पर सामूहिक रुख अपनाया जा सके।
कतर की तीखी आलोचना
कतर ने आधिकारिक बयान जारी कर इज़राइली प्रधानमंत्री के सुझाव को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन करार दिया।
कतर सरकार की प्रमुख बातें:
- कतर ने सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया।
- कतर ने चेतावनी दी कि इस तरह के बयान मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा सकते हैं और शांति प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं।
- कतर सरकार ने फिलिस्तीनियों के 1947 से पहले के ऐतिहासिक अधिकारों को बहाल करने की मांग दोहराई।
#Statement | Qatar strongly condemns the Israeli Prime Minister’s statements regarding the establishment of a Palestinian state on the Saudi territories#MOFAQatar pic.twitter.com/nNJWRkk2Ei
— Ministry of Foreign Affairs - Qatar (@MofaQatar_EN) February 9, 2025
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की प्रतिक्रिया
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी इज़राइली प्रधानमंत्री के बयान को उकसाने वाला और खतरनाक बताया।
सऊदी अरब की प्रतिक्रिया:
- सऊदी विदेश मंत्रालय ने इस बयान को मुस्लिम देशों की संप्रभुता पर हमला करार दिया।
- सऊदी किंग सलमान ने इज़राइल की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि
"इज़राइल क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुँचा रहा है और इसे तुरंत रोकना चाहिए।"
- सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की।
UAE की प्रतिक्रिया:
- UAE ने कहा कि
"इज़राइल का यह कदम अरब-इज़राइल शांति वार्ता के लिए एक बड़ा झटका है।"
- UAE के विदेश मंत्रालय ने फिलिस्तीनी क्षेत्र पर इज़राइल के कब्जे को अवैध घोषित किया और इसके खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की माँग की।
UAE Strongly Condemns and Denounces Reprehensible and Provocative Israeli Statements against the Kingdom of Saudi Arabiahttps://t.co/f6LjuGfaxT pic.twitter.com/hm55LM1LZ6
— MoFA وزارة الخارجية (@mofauae) February 8, 2025
ईरान का कड़ा रुख
ईरान ने हमेशा की तरह इज़राइल के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी जारी रखी।
ईरान की प्रतिक्रिया:
- ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के सलाहकार ने इस बयान की कड़ी आलोचना की और इसे
"फिलिस्तीनी भूमि पर कब्जा जमाने की साजिश" बताया।
- ईरान ने फिलिस्तीन के सशस्त्र संघर्ष को जायज़ ठहराया और हमास को अपना समर्थन दोहराया।
- ईरान ने मुस्लिम देशों से इज़राइल के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया।
— وزارة الخارجية العراقية (@Iraqimofa) February 9, 2025
तुर्की, जॉर्डन और अन्य देशों की प्रतिक्रियाएँ
तुर्की, जॉर्डन, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों ने भी इज़राइली बयान की आलोचना की।
तुर्की:
- राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान ने इस बयान को
"इज़राइल की एक और भड़काऊ हरकत" बताया।
- तुर्की ने फिलिस्तीनी स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन जारी रखने की बात कही।
जॉर्डन:
- जॉर्डन के विदेश मंत्री ने इस बयान को अरब देशों के मामलों में हस्तक्षेप करार दिया।
- जॉर्डन ने अरब लीग की बैठक बुलाने की माँग की।
मलेशिया और इंडोनेशिया:
- इन देशों ने कहा कि इज़राइल की नीतियाँ पूरे इस्लामी विश्व के लिए एक चुनौती हैं।
- उन्होंने फिलिस्तीन के समर्थन में नए कूटनीतिक कदम उठाने का संकेत दिया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र का रुख
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इज़राइली बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि
"फिलिस्तीन का भविष्य सिर्फ फिलिस्तीनी लोगों द्वारा तय किया जाना चाहिए, न कि किसी और देश द्वारा।"
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के कई सदस्यों ने इज़राइल की निंदा की, लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन ने इज़राइल का समर्थन किया।
अमेरिका का रुख:
- अमेरिका ने इज़राइल का समर्थन करते हुए इसे रक्षा नीति का हिस्सा बताया।
- हालांकि, कई अमेरिकी नेताओं ने इस बयान को अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाला कहा।
यूरोपीय संघ (EU) की प्रतिक्रिया:
- यूरोपीय संघ ने इज़राइल से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण माँगा।
- EU ने फिलिस्तीन के अधिकारों की सुरक्षा के लिए नई कूटनीतिक पहल शुरू करने का संकेत दिया।
मुस्लिम देशों की एकजुटता बनाम इज़राइली नीतियाँ
इज़राइली प्रधानमंत्री के विवादास्पद बयान ने पूरी दुनिया में आक्रोश पैदा कर दिया है। खासकर मुस्लिम देशों ने इसे फिलिस्तीनी अधिकारों के खिलाफ साजिश करार दिया है। पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, ईरान, तुर्की और अन्य देशों ने इज़राइल के खिलाफ कड़े कदम उठाने का संकेत दिया है।
अब यह देखना होगा कि क्या यह विरोध केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगा, या मुस्लिम देश इज़राइल के खिलाफ ठोस रणनीति अपनाएँगे। यह भी स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले समय में मध्य पूर्व की राजनीति को बड़े स्तर पर प्रभावित करेगा।
अरब और इस्लामी देशों ने सामूहिक रूप से इज़राइल के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इज़राइल के इस तरह के उकसाने वाले बयानों पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाएं। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि इज़राइली बयानबाज़ी न केवल सऊदी अरब की संप्रभुता के लिए खतरा है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और संघर्ष को भड़काने की एक कोशिश भी है।