इज़राइल के प्रधानमंत्री द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ दिए गए हालिया विवादास्पद बयानों के खिलाफ कई अरब और इस्लामी देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया

इज़राइल के प्रधानमंत्री द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ दिए गए हालिया विवादास्पद बयानों के खिलाफ कई अरब और इस्लामी देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया


इज़राइल के प्रधानमंत्री द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ दिए गए हालिया विवादास्पद बयानों के खिलाफ कई अरब और इस्लामी देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इन देशों ने इन बयानों को अनुचित, उकसाने वाला और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया है।

कुवैत की प्रतिक्रिया

कुवैत की विदेश मंत्रालय ने इज़राइली प्रधानमंत्री के बयानों की कड़ी निंदा की और सऊदी अरब के साथ एकजुटता व्यक्त की। कुवैत ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह किसी भी ऐसे कदम का विरोध करता है जो सऊदी अरब की संप्रभुता और स्थिरता को खतरे में डालता हो। इसके अलावा, कुवैत ने फिलिस्तीनी लोगों के जबरन विस्थापन की किसी भी योजना को सख्ती से खारिज करते हुए, 1967 की सीमाओं पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन दोहराया।


बहरीन का कड़ा विरोध

बहरीन की विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर सख्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने इज़राइली सरकार द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ दिए गए बयानों को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। बहरीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का गंभीर उल्लंघन बताया। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता तभी संभव होगी जब फिलिस्तीनी लोगों को उनके वैध अधिकार मिलेंगे, जिसमें उनकी संप्रभु स्वतंत्र राज्य की स्थापना भी शामिल है।

यमन की निंदा

यमन सरकार ने भी इज़राइली बयानों को उकसाने वाला और खतरनाक बताया। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि यह बयान न केवल सऊदी अरब बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है। यमन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में कड़ा रुख अपनाने की अपील की। साथ ही, उन्होंने सऊदी अरब द्वारा मध्य पूर्व में शांति की बहाली के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।

फिलिस्तीन का कड़ा प्रतिरोध

फिलिस्तीन के विदेश मंत्रालय ने इज़राइली सरकार के बयानों को नस्लवादी और भड़काऊ करार दिया। उन्होंने सऊदी अरब की संप्रभुता के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को अस्वीकार्य बताया और कहा कि इज़राइली सरकार की ऐसी बयानबाज़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ाने की सोची-समझी साजिश है।

खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की प्रतिक्रिया

खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासिम मोहम्मद अल-बुदैवी ने भी इज़राइली बयानों की तीव्र आलोचना की और इसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों और कानूनों का उल्लंघन बताया। उन्होंने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति सऊदी अरब और खाड़ी देशों की प्रतिबद्धता को दोहराया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इज़राइल के ऐसे उत्तेजक बयानों के खिलाफ ठोस कदम उठाने की मांग की।

जॉर्डन की कड़ी प्रतिक्रिया

जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने इज़राइली बयानों को खतरनाक बताते हुए, इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया। जॉर्डन ने सऊदी अरब के प्रति पूर्ण समर्थन जताते हुए, इज़राइली सरकार की नीतियों को क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने वाला बताया।

सूडान और ओमान की आपत्ति

सूडान के विदेश मंत्रालय ने भी इज़राइल की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह सऊदी अरब की संप्रभुता पर सीधा हमला है। सूडान ने इज़राइल की फिलिस्तीनी जनता को जबरन बाहर निकालने की योजना की निंदा करते हुए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर ध्यान देने की अपील की।

ओमान के विदेश मंत्रालय ने भी इज़राइली प्रधानमंत्री के बयानों की घोर निंदा की और सऊदी अरब के प्रति पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।

पाकिस्तान की कड़ी प्रतिक्रिया

पाकिस्तान ने इज़राइली प्रधानमंत्री के बयान की तीखी निंदा की और नेतन्याहू को 'आतंकवादी' और 'युद्ध अपराधी' करार दिया।

पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया:

  • प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने नेतन्याहू पर निशाना साधते हुए कहा,

    "नेतन्याहू एक आतंकवादी हैं, और उन्हें युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।"

  • पाकिस्तान सरकार ने यह भी घोषणा की कि वह इज़राइली उत्पादों का बहिष्कार करेगा और उन कंपनियों की पहचान करेगा जो इज़राइल का समर्थन करती हैं।
  • पाकिस्तान ने इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) की आपात बैठक बुलाने का सुझाव दिया ताकि इस मुद्दे पर सामूहिक रुख अपनाया जा सके।

कतर की तीखी आलोचना

कतर ने आधिकारिक बयान जारी कर इज़राइली प्रधानमंत्री के सुझाव को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन करार दिया।

कतर सरकार की प्रमुख बातें:

  • कतर ने सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया।
  • कतर ने चेतावनी दी कि इस तरह के बयान मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा सकते हैं और शांति प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं।
  • कतर सरकार ने फिलिस्तीनियों के 1947 से पहले के ऐतिहासिक अधिकारों को बहाल करने की मांग दोहराई।

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की प्रतिक्रिया

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी इज़राइली प्रधानमंत्री के बयान को उकसाने वाला और खतरनाक बताया।

सऊदी अरब की प्रतिक्रिया:

  • सऊदी विदेश मंत्रालय ने इस बयान को मुस्लिम देशों की संप्रभुता पर हमला करार दिया।
  • सऊदी किंग सलमान ने इज़राइल की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि

    "इज़राइल क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुँचा रहा है और इसे तुरंत रोकना चाहिए।"

  • सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की।

UAE की प्रतिक्रिया:

  • UAE ने कहा कि

    "इज़राइल का यह कदम अरब-इज़राइल शांति वार्ता के लिए एक बड़ा झटका है।"

  • UAE के विदेश मंत्रालय ने फिलिस्तीनी क्षेत्र पर इज़राइल के कब्जे को अवैध घोषित किया और इसके खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की माँग की।

ईरान का कड़ा रुख

ईरान ने हमेशा की तरह इज़राइल के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी जारी रखी।

ईरान की प्रतिक्रिया:

  • ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के सलाहकार ने इस बयान की कड़ी आलोचना की और इसे

    "फिलिस्तीनी भूमि पर कब्जा जमाने की साजिश" बताया।

  • ईरान ने फिलिस्तीन के सशस्त्र संघर्ष को जायज़ ठहराया और हमास को अपना समर्थन दोहराया।
  • ईरान ने मुस्लिम देशों से इज़राइल के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया।

तुर्की, जॉर्डन और अन्य देशों की प्रतिक्रियाएँ

तुर्की, जॉर्डन, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों ने भी इज़राइली बयान की आलोचना की।

तुर्की:

  • राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान ने इस बयान को

    "इज़राइल की एक और भड़काऊ हरकत" बताया।

  • तुर्की ने फिलिस्तीनी स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन जारी रखने की बात कही।

जॉर्डन:

  • जॉर्डन के विदेश मंत्री ने इस बयान को अरब देशों के मामलों में हस्तक्षेप करार दिया।
  • जॉर्डन ने अरब लीग की बैठक बुलाने की माँग की।

मलेशिया और इंडोनेशिया:

  • इन देशों ने कहा कि इज़राइल की नीतियाँ पूरे इस्लामी विश्व के लिए एक चुनौती हैं।
  • उन्होंने फिलिस्तीन के समर्थन में नए कूटनीतिक कदम उठाने का संकेत दिया।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र का रुख

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इज़राइली बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि

"फिलिस्तीन का भविष्य सिर्फ फिलिस्तीनी लोगों द्वारा तय किया जाना चाहिए, न कि किसी और देश द्वारा।"

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के कई सदस्यों ने इज़राइल की निंदा की, लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन ने इज़राइल का समर्थन किया।

अमेरिका का रुख:

  • अमेरिका ने इज़राइल का समर्थन करते हुए इसे रक्षा नीति का हिस्सा बताया।
  • हालांकि, कई अमेरिकी नेताओं ने इस बयान को अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाला कहा।

यूरोपीय संघ (EU) की प्रतिक्रिया:

  • यूरोपीय संघ ने इज़राइल से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण माँगा
  • EU ने फिलिस्तीन के अधिकारों की सुरक्षा के लिए नई कूटनीतिक पहल शुरू करने का संकेत दिया।

मुस्लिम देशों की एकजुटता बनाम इज़राइली नीतियाँ

इज़राइली प्रधानमंत्री के विवादास्पद बयान ने पूरी दुनिया में आक्रोश पैदा कर दिया है। खासकर मुस्लिम देशों ने इसे फिलिस्तीनी अधिकारों के खिलाफ साजिश करार दिया है। पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, ईरान, तुर्की और अन्य देशों ने इज़राइल के खिलाफ कड़े कदम उठाने का संकेत दिया है।

अब यह देखना होगा कि क्या यह विरोध केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगा, या मुस्लिम देश इज़राइल के खिलाफ ठोस रणनीति अपनाएँगे। यह भी स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले समय में मध्य पूर्व की राजनीति को बड़े स्तर पर प्रभावित करेगा

अरब और इस्लामी देशों ने सामूहिक रूप से इज़राइल के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इज़राइल के इस तरह के उकसाने वाले बयानों पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाएं। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि इज़राइली बयानबाज़ी न केवल सऊदी अरब की संप्रभुता के लिए खतरा है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और संघर्ष को भड़काने की एक कोशिश भी है।

Furkan S Khan

देश दुनिया में रह रहे भारतीय प्रवासियों से सम्बंधित समाचार, यहां मुख्य रूप से सऊदी अरब एवं गल्फ देशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों से सम्बंधित हिन्दी भाषा में समाचार एवं शायरी प्रकाशित की जाती है, ताजा अपडेट के लिए बनें रहे हमारे साथ, (मूड क्यों है आप का खराब हमें फॉलो करें न जनाब) facebook twitter instagram youtube

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